श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान‍्की शरणमें जाना और भगवान‍्का मायामोहको प्रकट करना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.17.35 
श्रीपराशर उवाच
स्तोत्रस्य चावसाने ते ददृशु: परमेश्वरम्।
शङ्खचक्रगदापाणिं गरुडस्थं सुरा हरिम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले - हे मैत्रेय! स्तोत्र समाप्त होने पर देवताओं ने अपने सामने शंख, चक्र और गदा धारण किए हुए तथा गरुड़ पर सवार परम पुरुष श्रीहरि को विराजमान देखा।
 
Sri Parashara said - O Maitreya! After the completion of the hymn, the gods saw the Supreme Being Sri Hari sitting before them, holding a conch, a discus and a mace in His hands and riding on Garuda.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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