श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान‍्की शरणमें जाना और भगवान‍्का मायामोहको प्रकट करना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.17.34 
सकलमिदमजस्य यस्य रूपं
परमपदात्मवतस्सनातनस्य।
तमनिधनमशेषबीजभूतं
प्रभुममलं प्रणतास्स्म वासुदेवम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
हम उन सनातन एवं अजन्मा भगवान वासुदेव को नमस्कार करते हैं, जिनकी आत्मा ही ब्रह्म का परमधाम है, जो इस समस्त भौतिक जगत के बीज हैं, अविनाशी एवं शुद्ध हैं। ॥34॥
 
We bow to the eternal and unborn Lord Vasudeva, whose soul is the supreme abode of Brahman, and who is the seed of all this material world, indestructible and pure. ॥34॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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