श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान‍्की शरणमें जाना और भगवान‍्का मायामोहको प्रकट करना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.17.33 
यन्न: शरीरेषु यदन्यदेहे-
ष्वशेषवस्तुष्वजमक्षयं यत्।
तस्माच्च नान्यद्‍व्यतिरिक्तमस्ति
ब्रह्मस्वरूपाय नता: स्म तस्मै॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
जो हमारे शरीर में, अन्य प्राणियों के शरीर में तथा समस्त वस्तुओं में स्थित है, जो अजन्मा और अविनाशी है, तथा जिसके अतिरिक्त अन्य कोई सत्ता नहीं है, उस परम पुरुष को हम नमस्कार करते हैं। ॥33॥
 
We offer our salutations to that Supreme Being who is present in our bodies, in the bodies of other beings and in all things, who is unborn and indestructible, and who has no other existence besides Him. ॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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