श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान‍्की शरणमें जाना और भगवान‍्का मायामोहको प्रकट करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.17.31 
प्रधानबुद्धॺादिमयादशेषा-
द्यदन्यदस्मात्परमं परात्मन्।
रूपं तवाद्यं यदनन्यतुल्यं
तस्मै नम: कारणकारणाय॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे परमेश्र्वर! जो आदि और महाभूतों के रूप में सम्पूर्ण जगत से परे हैं, जो सबका मूल कारण हैं और जिनका आपके समान कोई दूसरा रूप नहीं है, मैं आपके उस रूप को नमस्कार करता हूँ जो प्रकृति आदि समस्त कारणों का भी कारण है॥31॥
 
O Supreme Being! The One who is beyond the whole universe in the form of the prime and the great elements, who is the root cause of everything and who has no other form like you, I salute that form of Yours which is the cause of all the causes of nature etc. ॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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