श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान‍्की शरणमें जाना और भगवान‍्का मायामोहको प्रकट करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  3.17.3 
श्रीमैत्रेय उवाच
षण्ढापविद्धप्रमुखा विदिता भगवन्मया।
उदक्याद्याश्च मे सम्यङ् नग्नमिच्छामि वेदितुम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
श्री मैत्रेय बोले - हे प्रभु! मैं नपुंसक, अपवित्र और रजस्वला लोगों के बारे में तो भली-भाँति जानता हूँ [किन्तु 'नग्न' किसे कहते हैं, यह मैं नहीं जानता]। अतः इस समय मैं नग्नों के बारे में जानना चाहता हूँ।
 
Sri Maitreya said - O Lord! I know very well about impotent, impure and menstruating people [but I do not know what is called 'naked']. Hence, at this time I want to know about the naked.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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