श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान‍्की शरणमें जाना और भगवान‍्का मायामोहको प्रकट करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.17.25 
भक्षयत्यथ कल्पान्ते भूतानि यदवारितम्।
त्वद्‍रूपं पुण्डरीकाक्ष तस्मै कालात्मने नम:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे पुण्डरीकाक्ष! जो कल्प के अन्त में सम्पूर्ण भूतों को भस्म कर देते हैं, उन सनातन स्वरूप को नमस्कार है॥25॥
 
The one who essentially consumes all the ghosts at the end of the Kalpa, O Pundarikaksha! Salutations to that eternal form of yours. 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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