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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान्की शरणमें जाना और भगवान्का मायामोहको प्रकट करना
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श्लोक 24
श्लोक
3.17.24
अवबोधि च यच्छान्तमदोषमपकल्मषम्।
ऋषिरूपात्मने तस्मै विष्णो रूपाय ते नम:॥ २४॥
अनुवाद
हे विष्णु! मैं आपके ज्ञान, शांति, दोषरहित और पापों से रहित ऋषिवत रूप को नमस्कार करता हूँ॥24॥
O Vishnu! I salute your sagely form which is full of knowledge, tranquility, faultlessness and is free from sins. ॥24॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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