श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान‍्की शरणमें जाना और भगवान‍्का मायामोहको प्रकट करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.17.22 
हर्षप्रायमसंसर्गि गतिमद‍्गमनादिषु।
सिद्धाख्यं तव यद्‍रूपं तस्मै सिद्धात्मने नम:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
आपका जो सिद्ध नाम वाला स्वरूप है, जो जल, अग्नि आदि स्थानों पर जाकर भी सदैव प्रसन्न और विरक्त रहता है, ऐसे सिद्ध स्वरूप को मैं नमस्कार करता हूँ।
 
The form called Siddha that is yours who remains always happy and detached even after going to places like water, fire etc.; I salute you as such a Siddha.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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