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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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श्रीचैतन्य भागवत
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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान्की शरणमें जाना और भगवान्का मायामोहको प्रकट करना
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श्लोक 20
श्लोक
3.17.20
क्रौर्यमायामयं घोरं यच्च रूपं तवासितम्।
निशाचरात्मने तस्मै नमस्ते पुरुषोत्तम॥ २०॥
अनुवाद
हे भगवान्! मैं आपके उस राक्षसी रूप को नमस्कार करता हूँ जो क्रूरता और माया से युक्त है तथा अंधकार से पूर्ण है॥20॥
O Supreme Personality of Godhead! I salute your demonic form which is full of cruelty and illusion and is full of darkness. ॥20॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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