श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान‍्की शरणमें जाना और भगवान‍्का मायामोहको प्रकट करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.17.2 
मयाप्येतदशेषेण कथितं भवतो द्विज।
समुल्लङ‍‍्घ्य सदाचारं कश्चिन्नाप्नोति शोभनम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे द्विज! मैंने तुम्हें यह भी विस्तारपूर्वक बताया है। कोई भी मनुष्य सदाचार का उल्लंघन करके मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकता॥ 2॥
 
O Dwija! I have also explained this to you in detail. No man can attain salvation by violating the moral conduct.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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