श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान‍्की शरणमें जाना और भगवान‍्का मायामोहको प्रकट करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.17.19 
नातिज्ञानवहा यस्मिन्नाडॺ: स्तिमिततेजसि।
शब्दादिलोभि यत्तस्मै तुभ्यं यक्षात्मने नम:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
आपके उस मंदसत्वरूप यक्षरूप को नमस्कार है, जिसमें हृदय की नाड़ियाँ बहुत ज्ञानवान नहीं हैं और जो शब्द आदि विषयों का लोभी है ॥19॥
 
Salutations to that Yaksha form of yours in the Mandasattva form in which the nerves of the heart are not very knowledgeable and who is greedy for subjects like words etc. 19॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas