vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 3: तृतीय अंश
»
अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान्की शरणमें जाना और भगवान्का मायामोहको प्रकट करना
»
श्लोक 18
श्लोक
3.17.18
दम्भप्रायमसम्बोधि तितिक्षादमवर्जितम्।
यद्रूपं तव गोविन्द तस्मै दैत्यात्मने नम:॥ १८॥
अनुवाद
हे गोविन्द! आपके उस अभिमानी, अज्ञानी, अहंकार और दंभ से रहित राक्षस मूर्ति को नमस्कार है॥18॥
Hey Govind! Salutations to that demon idol of yours who is proud, ignorant and devoid of arrogance and conceit. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×