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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान्की शरणमें जाना और भगवान्का मायामोहको प्रकट करना
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श्लोक 16
श्लोक
3.17.16
तत्रेश तव यत्पूर्वं त्वन्नाभिकमलोद्भवम्।
रूपं विश्वोपकाराय तस्मै ब्रह्मात्मने नम:॥ १६॥
अनुवाद
हे प्रभु! मैं आपके उस ब्रह्मरूप को नमस्कार करता हूँ जो जगत के हित के लिए आपके नाभि-कमल से प्रकट हुआ है।॥16॥
O Lord! I salute that Brahma form which is Your first form which appeared from Your navel-lotus for the benefit of the world.॥ 16॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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