श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान‍्की शरणमें जाना और भगवान‍्का मायामोहको प्रकट करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.17.15 
एकं तवैतद्भूतात्मन्मूर्त्तामूर्त्तमयं वपु:।
आब्रह्मस्तम्बपर्यन्तं स्थानकालविभेदवत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे परमात्मा! ब्रह्मा से लेकर स्तंभ तक, देश-काल के भेद से रहित, जड़-भौतिक पदार्थों से युक्त यह सम्पूर्ण जगत् आपका ही शरीर है। 15॥
 
O Supreme Soul! From Brahma to the pillar, this entire universe of material and physical objects, without any distinction between space and time, is your body. 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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