श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान‍्की शरणमें जाना और भगवान‍्का मायामोहको प्रकट करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.17.14 
त्वमुर्वी सलिलं वह्निर्वायुराकाशमेव च।
समस्तमन्त:करणं प्रधानं तत्पर: पुमान्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, अन्तःकरण, मूल प्रकृति और प्रकृति से परे पुरुष - ये सब आप ही हैं ॥14॥
 
Earth, water, fire, air, sky, conscience, basic nature and the man beyond nature – all these are you. 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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