श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 17: नग्नविषयक प्रश्न, देवताओंका पराजय, उनका भगवान‍्की शरणमें जाना और भगवान‍्का मायामोहको प्रकट करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.17.1 
श्रीपराशर उवाच
इत्याह भगवानौर्वस्सगराय महात्मने।
सदाचारं पुरा सम्यङ् मैत्रेय परिपृच्छते॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले - 'हे मैत्रेय! पूर्वकाल में महात्मा सगर के पूछने पर भगवान और्व ने गृहस्थ के सदाचार को इस प्रकार समझाया था। ॥1॥
 
Shri Parashara said, 'O Maitreya! In the past, when Mahatma Sagar asked about this, Lord Aurva had explained the good conduct of a householder in this manner. ॥ 1॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas