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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 16: श्राद्ध-कर्ममें विहित और अविहित वस्तुओंका विचार
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श्लोक 20
श्लोक
3.16.20
गौरीं वाप्युद्वहेत्कन्यां नीलं वा वृषमुत्सृजेत्।
यजेत वाश्वमेधेन विधिवद्दक्षिणावता॥ २०॥
अनुवाद
अथवा वह गौरी कन्या से विवाह करेगा, नीलगायन को त्याग देगा अथवा विधिपूर्वक दक्षिणा सहित अश्वमेध यज्ञ करेगा?’ 20॥
Or will he marry a Gauri girl, leave the blue bull or perform Ashwamedha Yagya with Dakshina as per the rituals?' 20॥
इति श्रीविष्णुपुराणे तृतीयेंऽशे षोडशोऽध्याय:॥ १६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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