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श्लोक 3.16.17  |
श्रूयते चापि पितृभिर्गीता गाथा महीपते।
इक्ष्वाकोर्मनुपुत्रस्य कलापोपवने पुरा॥ १७॥ |
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| अनुवाद |
| हे राजन! इस सम्बन्ध में एक कथा सुनी जाती है, जो प्राचीन काल में कलाप उपवन में मनु के पुत्र महाराज इक्ष्वाकु को पितरों ने सुनाई थी॥17॥ |
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| O king! In this regard, a story is heard which was told in ancient times to Manu's son Maharaj Ikshvaku in the Kalap Upvan by the ancestors. 17॥ |
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