श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 16: श्राद्ध-कर्ममें विहित और अविहित वस्तुओंका विचार  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.16.15 
नखादिना चोपपन्नं केशकीटादिभिर्नृप।
न चैवाभिषवैर्मिश्रमन्नं पर्युषितं तथा॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! श्राद्ध में ऐसा भोजन न दें जिसमें नख, बाल, कीड़े आदि हों, अथवा जो निचोड़कर निकाले गए रस में मिला हो, अथवा बासी हो॥15॥
 
O King! Do not offer food in Shraddha which has nails, hair or insects etc. or which is mixed with juice extracted by squeezing or is stale.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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