श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 15: श्राद्ध-विधि  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  3.15.56 
सहस्रस्यापि विप्राणां योगी चेत्पुरत: स्थित:।
सर्वान‍्भोक्तॄंस्तारयति यजमानं तथा नृप॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! यदि श्राद्धभोजन करने वाले एक हजार ब्राह्मणों के सामने कोई योगी हो, तो वह यजमान सहित सभी को मुक्ति प्रदान कर देता है।
 
O King, if there is a Yogi in front of a thousand Brahmins eating Shraddha Bhojan, he liberates all of them including the host. 56.
 
इति श्रीविष्णुपुराणे तृतीयेंऽशे पञ्चदशोऽध्याय:॥ १५॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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