श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 15: श्राद्ध-विधि  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  3.15.52 
त्रीणि श्राद्धे पवित्राणि दौहित्र: कुतपस्तिला:।
रजतस्य तथा दानं कथासंकीर्तनादिकम्॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
दौहित्र (पुत्री का पुत्र), कुतप (दिन का आठवाँ मुहूर्त) और तिल - ये तीन, साथ ही चाँदी का दान और उसकी चर्चा - ये सब श्राद्ध काल में पवित्र माने जाते हैं ॥ 52॥
 
Dauhitra (daughter's son), Kutpa (the eighth muhurta of the day) and sesame seeds - these three, as well as the donation of silver and talking about it - all these are considered sacred during the Shraddha period. ॥ 52॥
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