त्रीणि श्राद्धे पवित्राणि दौहित्र: कुतपस्तिला:।
रजतस्य तथा दानं कथासंकीर्तनादिकम्॥ ५२॥
अनुवाद
दौहित्र (पुत्री का पुत्र), कुतप (दिन का आठवाँ मुहूर्त) और तिल - ये तीन, साथ ही चाँदी का दान और उसकी चर्चा - ये सब श्राद्ध काल में पवित्र माने जाते हैं ॥ 52॥
Dauhitra (daughter's son), Kutpa (the eighth muhurta of the day) and sesame seeds - these three, as well as the donation of silver and talking about it - all these are considered sacred during the Shraddha period. ॥ 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥