श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 15: श्राद्ध-विधि  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  3.15.47 
मातामहानामप्येवं सह देवै: क्रम: स्मृत:।
भोजने च स्वशक्त्या च दाने तद्वद्विसर्जने॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
विश्वदेवगणों सहित मातामह आदि के श्राद्ध में भी ब्राह्मण भोजन, दान और विसर्जन आदि की यही विधि बताई गई है ॥47॥
 
The same method of Brahmin food, donation and immersion etc. has been explained in the Shraddha of Matamah etc along with Vishwadevgan. 47॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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