श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 15: श्राद्ध-विधि  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  3.15.46 
तथेति चोक्ते तैर्विप्रै: प्रार्थनीयास्तथाशिष:।
पश्चाद्विसर्जयेद्देवान‍्पूर्वं पित्र्यान्महीपते॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
जब ब्राह्मण 'तथास्तु' कहें, तब उनका आशीर्वाद लें और फिर पहले पितृ पक्ष के ब्राह्मणों को और फिर देव पक्ष के ब्राह्मणों को विदा करें। 46.
 
When the Brahmins say 'Tathastu', ask for their blessings and then bid farewell to the Brahmins of Pitra Paksha first and then those of Dev Paksha. 46.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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