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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 15: श्राद्ध-विधि
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श्लोक 45
श्लोक
3.15.45
दत्त्वा च दक्षिणां तेभ्यो वाचयेद्वैश्वदेविकान्।
प्रीयन्तामिह ये विश्वेदेवास्तेन इतीरयेत्॥ ४५ ॥
अनुवाद
फिर वैश्वदेवी ब्राह्मणों के पास जाकर उन्हें दक्षिणा दे और कहे, ‘इस दक्षिणा से विश्वदेवता प्रसन्न हों’ ॥45॥
Then Vaishvadevik should go near the Brahmins and give them dakshina and say, 'May the world gods be pleased with this dakshina'. 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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