श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 15: श्राद्ध-विधि  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  3.15.43 
पिण्डैर्मातामहांस्तद्वद‍्गन्धमाल्यादिसंयुतै:।
पूजयित्वा द्विजाग्रॺाणां दद्याच्चाचमनं तत:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार सुगन्ध और मधु से युक्त पदार्थों से मातामह आदिका का पूजन करो और फिर द्विजश्रेष्ठों का पूजन कराओ ॥43॥
 
In the same way, worship Matamah Adiika with substances filled with fragrance and honey and then get the Dwijshreshthas worshiped. 43॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd