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श्लोक 3.15.43  |
पिण्डैर्मातामहांस्तद्वद्गन्धमाल्यादिसंयुतै:।
पूजयित्वा द्विजाग्रॺाणां दद्याच्चाचमनं तत:॥ ४३॥ |
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| अनुवाद |
| इसी प्रकार सुगन्ध और मधु से युक्त पदार्थों से मातामह आदिका का पूजन करो और फिर द्विजश्रेष्ठों का पूजन कराओ ॥43॥ |
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| In the same way, worship Matamah Adiika with substances filled with fragrance and honey and then get the Dwijshreshthas worshiped. 43॥ |
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