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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 15: श्राद्ध-विधि
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श्लोक 34
श्लोक
3.15.34
पिता पितामहश्चैव तथैव प्रपितामह:।
तृप्तिं प्रयान्तु पिण्डेन मया दत्तेन भूतले॥ ३४॥
अनुवाद
मेरे पिता, पितामह और परदादा पृथ्वी को अर्पित मेरे तर्पण से तृप्त हों ॥ 34॥
May my father, grandfather and great grandfather gain satisfaction from the offerings I have made to the earth. ॥ 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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