श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 15: श्राद्ध-विधि  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.15.12 
तस्मात्प्रथममत्रोक्तं द्विजाग्रॺाणां निमन्त्रणम्।
अनिमन्त्र्य द्विजानेवमागतान्भोजयेद्यतीन्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
अतः श्राद्ध के प्रथम दिन उपर्युक्त गुणों वाले द्विजश्रेष्ठों को आमंत्रित करना चाहिए और यदि उस दिन कोई बिन बुलाया तपस्वी ब्राह्मण घर पर आ जाए तो उसे भी भोजन कराना चाहिए ॥12॥
 
Therefore, on the first day of Shraddha, one should invite the Dwijashresthas having the above qualities and if any uninvited ascetic Brahmin comes to the house on that day, then feed them also. 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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