श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 15: श्राद्ध-विधि  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.15.11 
श्राद्धे नियुक्तो भुक्त्वा वा भोजयित्वा नियुज्य च।
व्यवायी रेतसो गर्त्ते मज्जयत्यात्मन: पितॄन्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य श्राद्ध में बुलाकर या भोजन करके अथवा भोजन कराकर या आमंत्रित करके स्त्री के साथ संभोग करता है, वह मानो अपने पितरों को वीर्य के कुंड में डुबो देता है ॥11॥
 
A man who has sexual intercourse with a woman after being invited to Shraddha or after eating food or by inviting or serving food, it is as if he drowns his ancestors in a pool of semen. 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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