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श्लोक 3.14.31  |
और्व उवाच
इत्येतत्पितृभिर्गीतं भावाभावप्रयोजनम्।
य: करोति कृतं तेन श्राद्धं भवति पार्थिव॥ ३१॥ |
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| अनुवाद |
| और्व ने कहा - हे राजन! जो मनुष्य पितरों के बताए अनुसार आचरण करता है, चाहे उसके पास धन हो या न हो, वह उसी विधि का पालन करते हुए विधिपूर्वक श्राद्ध कर्म करता है॥31॥ |
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| Aurva said - O King! A man who acts in the manner prescribed by the ancestors, whether he has wealth or not, performs the Shraddha ritual in a proper manner by following that ritual. ॥ 31॥ |
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| इति श्रीविष्णुपुराणे तृतीयेंऽशे चतुर्दशोऽध्याय:॥ १४॥ |
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