श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 14: श्राद्ध-प्रशंसा, श्राद्धमें पात्रापात्रका विचार  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.14.29 
सर्वाभावे वनं गत्वा कक्षमूलप्रदर्शक:।
सूर्यादिलोकपालानामिदमुच्चैर्वदिष्यति॥ २९॥
 
 
अनुवाद
और इन सब वस्तुओं के अभाव में जो वन में जाकर सूर्य आदि दिक्पालों को अपना करवट दिखाएगा, वह ऊंचे स्वर में यही कहेगा ॥29॥
 
And in the absence of all these things, he who goes into the forest and shows his side to the Sun and other Dikpalas will say this in a loud voice. ॥ 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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