| श्री विष्णु पुराण » अंश 3: तृतीय अंश » अध्याय 14: श्राद्ध-प्रशंसा, श्राद्धमें पात्रापात्रका विचार » श्लोक 28 |
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| | | | श्लोक 3.14.28  | यत: कुतश्चित्सम्प्राप्य गोभ्यो वापि गवाह्निकम्।
अभावे प्रीणयन्नस्माञ्च्छ्रद्धायुक्त: प्रदास्यति॥ २८॥ | | | | | | अनुवाद | | और यदि इसमें भी कमी हो तो वह कहीं से एक दिन का चारा लाकर हमारे प्रयोजन के लिए प्रेम और भक्तिपूर्वक गाय को खिला देगा॥ 28॥ | | | | And if even this is lacking, he will bring fodder for a day from somewhere and feed the cow with love and devotion for our purpose.॥ 28॥ | | ✨ ai-generated | | |
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