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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 14: श्राद्ध-प्रशंसा, श्राद्धमें पात्रापात्रका विचार
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श्लोक 27
श्लोक
3.14.27
तिलैस्सप्ताष्टभिर्वापि समवेतं जलाञ्जलिम्।
भक्तिनम्रस्समुद्दिश्य भुव्यस्माकं प्रदास्यति॥ २७॥
अनुवाद
अथवा हमारे प्रयोजन के लिए वह भक्तिपूर्वक और विनम्र मन से पृथ्वी पर सात-आठ तिलों से जल अर्पण करेगा ॥27॥
Or for our purpose, he will give water offering with seven to eight tilas on the earth with a devotional and humble mind. 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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