श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 14: श्राद्ध-प्रशंसा, श्राद्धमें पात्रापात्रका विचार  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.14.24 
अन्नेन वा यथाशक्त्या कालेऽस्मिन्भक्तिनम्रधी:।
भोजयिष्यति विप्राग्रॺांस्तन्मात्रविभवो नर:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
अथवा जो केवल अन्न और वस्त्र के धन के कारण, श्रद्धा और विनम्र मन से श्राद्धकाल में श्रेष्ठ ब्राह्मणों को यथासम्भव भोजन कराएगा ॥24॥
 
Or due to mere wealth of food and clothing, who will feed as much food as possible to the best brahmins during the Shraddha period with devotion and humble mind. 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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