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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 14: श्राद्ध-प्रशंसा, श्राद्धमें पात्रापात्रका विचार
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श्लोक 22
श्लोक
3.14.22
अपि धन्य: कुले जायादस्माकं मतिमान्नर:।
अकुर्वन्वित्तशाठॺं य: पिण्डान्नो निर्वपिष्यति॥ २२॥
अनुवाद
[पितर कहते हैं:] 'क्या हमारे कुल में ऐसा बुद्धिमान और धन्य पुरुष जन्म लेगा जो धन का लोभ त्यागकर हमें पिण्डदान करेगा?'
[The ancestors say:] 'Will such a wise and blessed man be born in our clan who, giving up his greed for wealth, will offer Pind-daan to us?'
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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