श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 14: श्राद्ध-प्रशंसा, श्राद्धमें पात्रापात्रका विचार  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.14.20 
चित्तं च वित्तं च नृणां विशुद्धं
शस्तश्च काल: कथितो विधिश्च।
पात्रं यथोक्तं परमा च भक्ति-
र्नृणां प्रयच्छन्त्यभिवाञ्छितानि॥ २०॥
 
 
अनुवाद
शुद्ध मन, शुद्ध धन, उपयुक्त समय, उपयुक्त विधि, उपयुक्त पात्र और उत्तम भक्ति - ये सभी मनुष्य को इच्छित फल प्रदान करते हैं ॥20॥
 
A pure mind, pure wealth, opportune moment, the appropriate method, a suitable candidate and supreme devotion - all these give a man the desired results. ॥20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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