श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 14: श्राद्ध-प्रशंसा, श्राद्धमें पात्रापात्रका विचार  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.14.18 
गंगां शतद्रूं यमुनां विपाशां
सरस्वतीं नैमिषगोमतीं वा।
तत्रावगाह्यार्चनमादरेण
कृत्वा पितॄणां दुरितानि हन्ति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
नैमिषारण्य में स्थित गंगा, शतद्रु, यमुना, विपश्यना, सरस्वती और गोमती में स्नान करके तथा आदरपूर्वक पितरों का पूजन करके मनुष्य अपने सभी पापों का नाश कर देता है ॥18॥
 
By bathing in the Ganga, Shatadru, Yamuna, Vipashya, Saraswati and the Gomati situated in Naimisharanya and worshipping the ancestors with respect, a man destroys all his sins. ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)