| श्री विष्णु पुराण » अंश 3: तृतीय अंश » अध्याय 14: श्राद्ध-प्रशंसा, श्राद्धमें पात्रापात्रका विचार » श्लोक 16 |
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| | | | श्लोक 3.14.16  | काले धनिष्ठा यदि नाम तस्मि-
न्भवेत्तु भूपाल तदा पितृभ्य:।
दत्तं जलान्नं प्रददाति तृप्तिं
वर्षायुतं तत्कुलजैर्मनुष्यै:॥ १६॥ | | | | | | अनुवाद | | और यदि उस समय (माघ की अमावस्या में) धनिष्ठा नक्षत्र का संयोग हो, तो पितर अपने ही कुल में उत्पन्न मनुष्य द्वारा दिए गए भोजन से दस हजार वर्षों तक तृप्त रहते हैं॥16॥ | | | | And if there is a combination of Dhanishtha Nakshatra at that time (in the new moon day of Magha), then the ancestors remain satisfied for ten thousand years with the food given by a man born in their own clan. 16॥ | | ✨ ai-generated | | |
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