श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 14: श्राद्ध-प्रशंसा, श्राद्धमें पात्रापात्रका विचार  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  3.14.1-2 
और्व उवाच
ब्रह्मेन्द्ररुद्रनासत्यसूर्याग्निवसुमारुतान्।
विश्वेदेवान‍्पितृगणान्वयांसि मनुजान्पशून्॥ १॥
सरीसृपानृषिगणान्यच्चान्यद्भूतसंज्ञितम्।
श्राद्धं श्रद्धान्वित: कुर्वन्प्रीणयत्यखिलं जगत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
और्व बोले - हे राजन! भक्तिपूर्वक श्राद्ध करने से मनुष्य ब्रह्मा, इन्द्र, रुद्र, अश्विनी कुमार, सूर्य, अग्नि, वसुगण, मरुद्गण, विश्वेदेव, पितर, पक्षी, मनुष्य, पशु, सरीसृप, ऋषि और भूत आदि सहित सम्पूर्ण जगत को प्रसन्न करता है। 1-2॥
 
Aurav said – O king! By performing Shraddha with devotion, a person pleases the entire world including Brahma, Indra, Rudra, Ashwini Kumar, Surya, Agni, Vasugana, Marudgana, Vishvedev, ancestors, birds, humans, animals, reptiles, sages and ghosts etc. 1-2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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