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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 13: आभ्युदयिक श्राद्ध, प्रेतकर्म तथा श्राद्धादिका विचार
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श्लोक 41
श्लोक
3.13.41
तस्मादुत्तरसंज्ञाया: क्रियास्ता: शृणु पार्थिव।
यथा यथा च कर्तव्या विधिना येन चानघ॥ ४१॥
अनुवाद
अतः हे निष्पाप! इन कर्मों को किस प्रकार करना चाहिए, यह सुनो ॥ 41॥
Therefore, O sinless one! Listen to the ways in which these subsequent actions should be performed. ॥ 41॥
इति श्रीविष्णुपुराणे तृतीयेंऽशे त्रयोदशोऽध्याय:॥ १३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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