हे पृथ्वीनाथ! इस अभ्युदय श्राद्ध से नान्दीमुख नामक पितर प्रसन्न होते हैं, अतः मनुष्यों को सभी प्रकार की वृद्धि के समय इस अनुष्ठान को करना चाहिए॥4॥
O Prithivinath! The ancestors named Nandimukh are pleased with this Abhyudaya Shraddha, hence men should perform this ritual at the time of all types of growth. 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥