श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 13: आभ्युदयिक श्राद्ध, प्रेतकर्म तथा श्राद्धादिका विचार  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.13.37 
प्रेते पितृत्वमापन्ने सपिण्डीकरणादनु।
क्रियन्ते या: क्रिया: पित्र्या: प्रोच्यन्ते ता नृपोत्तरा:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
और हे नृप! सपिण्डीकरण के पश्चात् मृतक के पितृत्व प्राप्त होने पर जो पितृकर्म किया जाता है, उसे उत्तरकर्म कहते हैं ॥37॥
 
And O Nripa! The ancestral rituals that are performed after the deceased person attains paternity after Sapindikarana are called Uttarakarma. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)