श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 13: आभ्युदयिक श्राद्ध, प्रेतकर्म तथा श्राद्धादिका विचार  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.13.35 
पूर्वा: क्रिया मध्यमाश्च तथा चैवोत्तरा: क्रिया:।
त्रिप्रकारा: क्रिया: सर्वास्तासां भेदं शृणुष्व मे॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
समस्त भूतकर्म तीन प्रकार के हैं - प्रथम कर्म, द्वितीय कर्म और द्वितीय कर्म। इनके पृथक-पृथक लक्षण सुनो ॥35॥
 
All the ghostly deeds are of three types- the first deed, the second deed and the second deed. Listen to their separate characteristics. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)