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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 13: आभ्युदयिक श्राद्ध, प्रेतकर्म तथा श्राद्धादिका विचार
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श्लोक 32
श्लोक
3.13.32
तेषामभावे सर्वेषां समानोदकसन्तति:।
मातृपक्षसपिण्डेन सम्बद्धा ये जलेन वा॥ ३२॥
अनुवाद
यदि इन सबका अभाव हो तो माता की ओर से समानोदक, सपिण्ड या समानोदक की संतान को इसका अधिकार होता है ॥32॥
If there is lack of all these then the progeny of Samanodaka or Sapinda or Samanodaka from the mother's side have the right to it. 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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