श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 13: आभ्युदयिक श्राद्ध, प्रेतकर्म तथा श्राद्धादिका विचार  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.13.31 
पुत्र: पौत्र: प्रपौत्रो वा भ्राता वा भ्रातृसन्तति:।
सपिण्डसन्ततिर्वापि क्रियार्हो नृप जायते॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! श्राद्ध कर्म करने का अधिकारी केवल पुत्र, पौत्र, प्रपौत्र, भाई, भतीजा अथवा सपिण्ड वंश में उत्पन्न पुरुष ही है। 31॥
 
O king! Only the son, grandson, great-grandson, brother, nephew or a man born in his Sapinda progeny is entitled to perform Shraddha rituals. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)