श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 13: आभ्युदयिक श्राद्ध, प्रेतकर्म तथा श्राद्धादिका विचार  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.13.25 
प्रश्नश्च तत्राभिरतिर्यजमानैर्द्विजन्मनाम्।
अक्षय्यममुकस्येति वक्तव्यं विरतौ तथा॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात जब यजमान 'अभिराम्यताम्' कहे, तब ब्राह्मण 'अभिर्त: स्मः' कहे और फिर पिण्डदान समाप्त होने पर 'अमुकस्य अक्षययामिदमुपतिष्टम्' यह वाक्य बोले ॥25॥
 
Thereafter, when the host says 'Abhiramyatam', the Brahmins should say 'Abhirta: Smah' and then after the Pind Daan is over, pronounce this sentence 'Amukasya Akshayayamidamupatishttam'. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)