श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 13: आभ्युदयिक श्राद्ध, प्रेतकर्म तथा श्राद्धादिका विचार  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.13.22 
ततस्स्ववर्णधर्मा ये विप्रादीनामुदाहृता:।
तान्कुर्वीत पुमाञ्जीवेन्निजधर्मार्जनैस्तथा॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् ब्राह्मण आदि वर्णों के लिए बताए गए वर्ण-धर्मों का पालन करना चाहिए; तथा अपने-अपने धर्म के अनुसार अर्जित जीवन व्यतीत करना चाहिए ॥22॥
 
Thereafter, one should follow the caste religions mentioned for the Brahmins etc. castes; And live the life earned according to one's own religion. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)