श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 13: आभ्युदयिक श्राद्ध, प्रेतकर्म तथा श्राद्धादिका विचार  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.13.19 
विप्रस्यैतद् द्वादशाहं राजन्यस्याप्यशौचकम्।
अर्धमासं तु वैश्यस्य मासं शूद्रस्य शुद्धये॥ १९॥
 
 
अनुवाद
यह (दस दिन की) अशुद्धि ब्राह्मण के लिए है; क्षत्रिय के लिए बारह दिन की, वैश्य के लिए पंद्रह दिन की और शूद्र के लिए एक महीने की अशुद्धि शुद्धि होती है॥19॥
 
This [ten days'] impurity is for a Brahmin; for a Kshatriya it lasts for twelve days and for a Vaishya it lasts for fifteen days. And for a Sudra the purification from impurity takes one month.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)