vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 3: तृतीय अंश
»
अध्याय 13: आभ्युदयिक श्राद्ध, प्रेतकर्म तथा श्राद्धादिका विचार
»
श्लोक 16
श्लोक
3.13.16
शय्यासनोपभोगश्च सपिण्डानामपीष्यते।
भस्मास्थिचयनादूर्ध्वं संयोगो न तु योषिताम्॥ १६॥
अनुवाद
राख और हड्डियों के जलने के बाद सपिण्ड पुरुष शय्या और आसन का उपयोग कर सकते हैं, परन्तु वे स्त्री के साथ मैथुन नहीं कर सकते ॥16॥
After the burning of ashes and bones, the Sapinda men may use the bed and seat but they cannot have sexual intercourse with a woman.॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×