चतुर्थेऽह्नि च कर्तव्यं तस्यास्थिचयनं नृप।
तदूर्ध्वमंगसंस्पर्शस्सपिण्डानामपीष्यते॥ १४॥
अनुवाद
हे राजन! अपवित्रता के चौथे दिन अस्थि-चयन करना चाहिए; उसके बाद ही अपने सपिण्ड सम्बन्धियों के शरीर के अंगों का स्पर्श करना चाहिए ॥14॥
O King, the asthi-selection should be done on the fourth day of the period of impurity; only after that can the body parts of one's Sapinda relatives be touched. ॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥