श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 13: आभ्युदयिक श्राद्ध, प्रेतकर्म तथा श्राद्धादिका विचार  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.13.12 
दिनानि तानि चेच्छात: कर्तव्यं विप्रभोजनम्।
प्रेता यान्ति तथा तृप्तिं बन्धुवर्गेण भुञ्जता॥ १२॥
 
 
अनुवाद
अशुद्धि काल में यदि ब्राह्मण चाहें तो उन्हें भोजन कराना चाहिए, क्योंकि उस समय ब्राह्मणों और बन्धु-बान्धवों द्वारा खाए गए भोजन से मृतात्मा तृप्त हो जाती है ॥12॥
 
During the period of impurity, if Brahmins wish, they should be fed, because at that time the dead soul gets satiated by the food eaten by Brahmins and relatives. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)